बुधवार, 24 जून 2020

नई कविता :- यादें ( उदय राज की नई कविता :- 9 ) ✍️

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                           शीर्षक :- यादें



यादें भी क्या चीज हैं
कभी हँसती हैं , तो कभी रोलती हैं
कभी अपनों से दूर करती
तो कभी अपनों के पास ले आती
यारों ये यादें ही तो हैं
जो हमेशा साथ रह जाती हैं ।

ये यादें भी कैसी चीज है
जो जिंदगी के हर पल को
हर दूसरे ही पल याद बना लेती हैं
और हम चाहे या ना चाहें बाद
में बहुत याद आती हैं
इस तरह हम इससे दूर
हो नहीं पाते , और
ये हमसे दूर रह नही पाती
और इस तरह ना चाह के भी इस
जिंदगीं में यादें ही यादें भर जाती हैं ।

ये यादें भी छोटी चीज नहीं है यारों
इन यादों में ही लोग क्या से
क्या कर जाते हैं
इन यादों को ही सँजोने में 
जीवन के बहुत से पलों को
यू ही बीता देते हैं
इस बात का तो इतिहास गवाह हैं
जब यादो को ही सँजोने में ताजमहल
जैसी इमारतें बन जाती है
यारो ये यादें ही हैं , जो
याद रखने के लिऐ  कुछ ना कुछ
करवाती हैं ।

याद करो उन पलों को, जब 
ददिहाल और ननिहाल में जाया करते थे
बहुत शरारते करने पर भी
वाह - वाह पाया करते थे
ना कुछ करके भी
सब्सिया पाया करते थे
याद करो उन पलों को भी
जब अंतिम चरण में जीवन के होंगे
तब किसी यादों पर परिवार संग
मुस्कराया करोगे , तो
किसी यादो पर अकेले घर के कोने पर
रोया और पसत्या करोगें
यारों ये यादें होतीं ही ऐसी हैं
जो जिंदगी भर साथ रह जाती हैं
फिर जिंदगी के हर पल में बहुत
याद आती हैं
और ना चाह कर भी इस जिंदगी में
इस तरह यादें ही यादें इस बस जाती हैं ।

ये यादें भी क्या चीज हैं
कभी हँसती हैं , तो कभी रोलती हैं
कभी अपनों से दूर करती , तो
कभी अपनों के पास ले आती
यारों ये यादें ही तो हैं
जो हमेशा साथ रह जाती हैं ।


            उदय राज (✍️ )


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इस कविता का यहाँ  चित्र  गूगल से लिया गया है ।

बुधवार, 17 जून 2020

नई कविता :- सम्मान मजदूर का ( उदय राज की नई कविता :- 8 ) ✍️

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                      शीर्षक :- सम्मान मजदूर का






 रहा इतिहास उन लोगो का भी
 दिया जिन्होंने हैं बलिदान
 रहा इतिहास उन लोगों का भी
 किया जिन्होंने हैं कुछ काम
 क्या रहा इतिहास उन लोगों का
 बनाया जिन्होंने हैं मकान
 ईँट पत्थर अपने कंधों पर उठा 
 पहुँचाया उसको आसमा पर
 मिला बदले में उनको
 250 - 300 - 400 का ईनाम
 क्या ये 250 - 300 - 400 का ईनाम
 दिला पायेगा उनको समाज मे सम्मान
 क्या ये ईनाम कर पायेगा
 उनकी मूलभूत जरूरतों का इंतजाम
 क्या कहूँ मे इन मजदूरों की 
 जिंदगी के बारे मे 
 कहूंगा बस इतना की 
 कर लो इनका सम्मान ,  कर लो इनका सम्मान , कर लो   इनका सम्मान ।

 शब्द भी कम पड़ जाते हैं
 कहने को इन मजदूरों के बारे में
 बात करूँ में किस पन्ने की 
 इनकी इस जिंदगी के बारे में
 इनकी जिंदगी का तो हर 
 पन्ना , कहता हैं सब कुछ
 अपने आप , बताता है तो
 कुछ सीखता भी हैं अपने आप   
 कहूंगा बस इतना की जान लो
 इनकी इस जिंदगी के बारे में
 पहचान लो इनकी इस जिंदगी के
 बारे में
 और दिल से सम्मान कर लो
 इनकी इस जिंदगी के बारे में
 ताकि ये भी बता सके
 सम्मान से अपनी इस 
 जिंदगी के बारे में ।


                          उदय राज (✍️)




    

बुधवार, 10 जून 2020

नई कविता :- दुखों से भरा जीवन ( उदय राज की नई कविता :- 7 )✍️

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              शीर्षक :- दुखों से भरा जीवन





      लेकर खाली थैला जिंदगी में
      खुशियां भरने चले थे लेकिन
      जब रास्ते मे रूक कर थैला देखा
      तो खुशियां की जगह कुछ
      दुःख भी साथ लेकर चल पड़े थे
      इन दुखों में भी कुछ
      अपने तो कुछ पराये के थे
      लेकिन सब लग रहे अपने थे

      इस दुखों से भरे जीवन मे
      दुख तो आते - जाते है
      साथ ही एक नई चिंता दे जाते हैं
      लेकिन इन दुखो की चिंता में
      हम जीवन जीना भूल जाते हैं

      कौन कहता हैं कि दुख.   
     जीवन मे चिंता भरते हैं
     मै कहता हूं कि दुख ही
     जीवन मे एक नई समस्या
     खड़ी करते हैं और इस
     समस्या के समाधान के कारण.
     ही हम कुछ नया सीख जाते हैं
     और यही सीखा हुआ नया ज्ञान
     हमे जीवन मे सफ़लता दिला जाते हैं



     लेकर खाली थैला जिंदगी में
     खुशियां भरने चले थे लेकिन
     जब रास्ते मे रुक कर थैला देखा
     तो खुशियों की जगह कुछ
     दुःख भी साथ लेकर चल पड़े थे ।


                                 उदय राज ✍️


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मंगलवार, 2 जून 2020

नई कविता :- तारो से भरी रात ( उदय राज की नई कविता :- 6 ) ✍️

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                     शीर्षक :- तारो से भरी रात





       अंधेरी चाँदनी रात में 
      तारों से भरे आसमान में
      मोहब्बत को ढूढ़ने निकले थे
      मोहब्बत तो ना मिली
      मोहब्बत करने वाली मिली ।
  
      मोहब्बत करने वाली भी 
      कुछ हमारे जैसी थी
      तो कुछ हम उसके जैसे थे
      इसी वजह मोहब्बत करने वाली के
      जितने पास हम जाते थे
      वो हमसे और उतनी
      दूर हो जाती थी
      बस यही करने में
      हमारी पूरी रात गुजरी थी ।

      सुबह होने पर पता चला
     की वो हमारा सपना था
     और वो सपना भी
     लग रहा बड़ा अपना था ।

     अंधेरी चाँदनी रात में
     तारो से भरे आसमान में
     मोहब्बत को ढूढ़ने निकले थे
     मोहब्बत तो ना मिली
     मोहब्बत करने वाली मिली ।


                   उदय राज ✍️
                 
     

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रविवार, 24 मई 2020

नई कविता :- कोरोना या जिंदगी ( उदयराज की नई कविता :- 5 ) ✍️

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                    शीर्षक :-  कोरोना या जिंदगी



कोरोना वायरस की फ़ोटो , कोरोना वायरस, कोरोना वायरस कैसे दिखता है , koronavirus images
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   ओ कोरोना , ओ कोरोना
   हम को यू परेशान करो ना
   लोग दिन - प्रतिदिन घट रहे है
   अब तुम भी जाने का नाम लो ना ।

  जिंदगी के हर पल तुम्हारी सोच में   बीत रहे है
  अब तुम भी हमारे बारे में सोचो ना
  कहने को ये जिंदगी बहुत छोटी है
  तुम उसको और छोटा ना करो ना
  ओ कोरोना , ओ कोरोना
  हम को यू परेशान करो ना ।

   तू जीता हम  हारे
   इस बात को समझ ले कोरोना
  अब तो शर्म खा
  और चला जा कोरोना
  ओ कोरोना , ओ कोरोना
  हम को यू परेशान करो ना ।

  जिंदगी के हर पल ऐसे बीत रहे हैं
  जैसे जेल में बैठा कैदी हो 
  ऐ भगवान अब तू ही जाने 
  आने वाला कल कैसा हो
  की हम जीतेंगे या ये कोरोना
  ऐ भगवान विश्वास है हमको तुझ पर
  बस इस विश्वास को टूटने मत देना
   खत्म करेंगे हम इसको
   बस इस विश्वास को तु बनाए रखना

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    ओ कोरोना , ओ कोरोना
   हम को यू परेशान करो ना ।

               
           
                 उदयराज ✍️
             


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इस कविता को लिखने का उदेश्य समाज को motivation और एकजुट करके कोरोना महामारी को खत्म करने का हैं ।

    

मंगलवार, 19 मई 2020

नई कविता :- अच्छा आदमी ( उदय राज की नई कविता - 4 ) ✍️

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                  शीर्षक :- अच्छा आदमी







अच्छे कपड़े पहनने से आदमी
अच्छा नही होता
अच्छा होता है, मन से
अच्छी शक्ल से आदमी
अच्छा नही होता
अच्छा होता है अपने कर्म से ।

अच्छी शारीरिक बनावट से
आदमी अच्छा नही होता
अच्छा होता है
अपने शरीर की वाणी से ।

अच्छे शब्दो के प्रयोग से
आदमी अच्छा नही होता
अच्छा होता है अच्छे विचारों से,
अच्छे आदमी के अच्छे गुण
बताने नही पड़ते,
अच्छे गुण खुद ही बोलने लगते है

अच्छे कपड़े से आदमी
अच्छा नही होता
अच्छा होता है मन से ।
 

                            उदय राज ✍️
                           
                        
                   

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इस कविता को लिखने का मेरा उद्देश्य किसी की भावना को प्रभावित करने का नही है बल्कि समाज के लोगों को एक अच्छा आदमी बनने के लिए motivation karne का हैं. |
               
       
  

शुक्रवार, 8 मई 2020

नई कविता:- खुली आँखों से ख़्वाब( उदय राज की नई कविता:- 3)✍️

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शीर्षक :- खुली आँखों से ख़्वाब







बंद आँखों से ख़्वाब देखना

बिन मौसम बरसात समान
खुली आंखों से ख़्वाब देखना 
अपने हाथों आसमान छूने सामान ।

कौन कहता हैं, खुली आंखों से

देखे ख़्वाब पूरे नही होते
बस खुली आँखों से देखे
ख़्वाब में संकल्प होने चाहिए  ।

बंद आँखों से देखे ख़्वाब

इंसान को इंसान ही बनाये रहते हैं
जो खुली आँखों से देखे ख़्वाब
इंसान को महान इंसान बना देते है ।

बंद आँखों से देखे ख़्वाब

इंसान को नींद में ही आते हैं
खुली आँखों से, जो देखे ख़्वाब
इंसान को नींद ही नही आने देते हैं

बंद आँखों के ख़्वाब, आँखे

खोलने पर टूट जाते हैं
खुली आँखो के ख्वाब
आँखे बंद करने पर भी
दिमाग में आते  हैं
कौन कहता हैं , की ख़्वाब
देखना गुना  हैं
मैं कहता हूं ख़्वाब ही
इंसान को ऊँचाईयों पर पहुचते हैं ।

बंद आँखों से ख़्वाब देखना

बिन मौसम बरसात समान
खुली आँखों से ख़्वाब देखना
अपने हाथों आसमान छूने समान ।।


                                                       उदय राज✍️

                                                    
                                                  
                                            
                               
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इस कविता को लिखने का मेरा उद्देश्य  किसी की भावना को प्रभावित करना नही हैं  बल्कि  समाज के लोगो और युवा को  motivation करना हैं ।