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शीर्षक :- खुली आँखों से ख़्वाब
बंद आँखों से ख़्वाब देखना
बिन मौसम बरसात समान
खुली आंखों से ख़्वाब देखना
अपने हाथों आसमान छूने सामान ।
कौन कहता हैं, खुली आंखों से
देखे ख़्वाब पूरे नही होते
बस खुली आँखों से देखे
ख़्वाब में संकल्प होने चाहिए ।
बंद आँखों से देखे ख़्वाब
इंसान को इंसान ही बनाये रहते हैं
जो खुली आँखों से देखे ख़्वाब
इंसान को महान इंसान बना देते है ।
बंद आँखों से देखे ख़्वाब
इंसान को नींद में ही आते हैं
खुली आँखों से, जो देखे ख़्वाब
इंसान को नींद ही नही आने देते हैं
बंद आँखों के ख़्वाब, आँखे
खोलने पर टूट जाते हैं
खुली आँखो के ख्वाब
आँखे बंद करने पर भी
दिमाग में आते हैं
कौन कहता हैं , की ख़्वाब
देखना गुना हैं
मैं कहता हूं ख़्वाब ही
इंसान को ऊँचाईयों पर पहुचते हैं ।
बंद आँखों से ख़्वाब देखना
बिन मौसम बरसात समान
खुली आँखों से ख़्वाब देखना
अपने हाथों आसमान छूने समान ।।
उदय राज✍️
Udayrajpoems.blogspot.com
इस कविता को लिखने का मेरा उद्देश्य किसी की भावना को प्रभावित करना नही हैं बल्कि समाज के लोगो और युवा को motivation करना हैं ।
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बंद आँखों से ख़्वाब देखना
बिन मौसम बरसात समान
खुली आंखों से ख़्वाब देखना
अपने हाथों आसमान छूने सामान ।
कौन कहता हैं, खुली आंखों से
देखे ख़्वाब पूरे नही होते
बस खुली आँखों से देखे
ख़्वाब में संकल्प होने चाहिए ।
बंद आँखों से देखे ख़्वाब
इंसान को इंसान ही बनाये रहते हैं
जो खुली आँखों से देखे ख़्वाब
इंसान को महान इंसान बना देते है ।
बंद आँखों से देखे ख़्वाब
इंसान को नींद में ही आते हैं
खुली आँखों से, जो देखे ख़्वाब
इंसान को नींद ही नही आने देते हैं
बंद आँखों के ख़्वाब, आँखे
खोलने पर टूट जाते हैं
खुली आँखो के ख्वाब
आँखे बंद करने पर भी
दिमाग में आते हैं
कौन कहता हैं , की ख़्वाब
देखना गुना हैं
मैं कहता हूं ख़्वाब ही
इंसान को ऊँचाईयों पर पहुचते हैं ।
बंद आँखों से ख़्वाब देखना
बिन मौसम बरसात समान
खुली आँखों से ख़्वाब देखना
अपने हाथों आसमान छूने समान ।।
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