रविवार, 24 मई 2020

नई कविता :- कोरोना या जिंदगी ( उदयराज की नई कविता :- 5 ) ✍️

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                    शीर्षक :-  कोरोना या जिंदगी



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   ओ कोरोना , ओ कोरोना
   हम को यू परेशान करो ना
   लोग दिन - प्रतिदिन घट रहे है
   अब तुम भी जाने का नाम लो ना ।

  जिंदगी के हर पल तुम्हारी सोच में   बीत रहे है
  अब तुम भी हमारे बारे में सोचो ना
  कहने को ये जिंदगी बहुत छोटी है
  तुम उसको और छोटा ना करो ना
  ओ कोरोना , ओ कोरोना
  हम को यू परेशान करो ना ।

   तू जीता हम  हारे
   इस बात को समझ ले कोरोना
  अब तो शर्म खा
  और चला जा कोरोना
  ओ कोरोना , ओ कोरोना
  हम को यू परेशान करो ना ।

  जिंदगी के हर पल ऐसे बीत रहे हैं
  जैसे जेल में बैठा कैदी हो 
  ऐ भगवान अब तू ही जाने 
  आने वाला कल कैसा हो
  की हम जीतेंगे या ये कोरोना
  ऐ भगवान विश्वास है हमको तुझ पर
  बस इस विश्वास को टूटने मत देना
   खत्म करेंगे हम इसको
   बस इस विश्वास को तु बनाए रखना

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    ओ कोरोना , ओ कोरोना
   हम को यू परेशान करो ना ।

               
           
                 उदयराज ✍️
             


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इस कविता को लिखने का उदेश्य समाज को motivation और एकजुट करके कोरोना महामारी को खत्म करने का हैं ।

    

मंगलवार, 19 मई 2020

नई कविता :- अच्छा आदमी ( उदय राज की नई कविता - 4 ) ✍️

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                  शीर्षक :- अच्छा आदमी







अच्छे कपड़े पहनने से आदमी
अच्छा नही होता
अच्छा होता है, मन से
अच्छी शक्ल से आदमी
अच्छा नही होता
अच्छा होता है अपने कर्म से ।

अच्छी शारीरिक बनावट से
आदमी अच्छा नही होता
अच्छा होता है
अपने शरीर की वाणी से ।

अच्छे शब्दो के प्रयोग से
आदमी अच्छा नही होता
अच्छा होता है अच्छे विचारों से,
अच्छे आदमी के अच्छे गुण
बताने नही पड़ते,
अच्छे गुण खुद ही बोलने लगते है

अच्छे कपड़े से आदमी
अच्छा नही होता
अच्छा होता है मन से ।
 

                            उदय राज ✍️
                           
                        
                   

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इस कविता को लिखने का मेरा उद्देश्य किसी की भावना को प्रभावित करने का नही है बल्कि समाज के लोगों को एक अच्छा आदमी बनने के लिए motivation karne का हैं. |
               
       
  

शुक्रवार, 8 मई 2020

नई कविता:- खुली आँखों से ख़्वाब( उदय राज की नई कविता:- 3)✍️

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शीर्षक :- खुली आँखों से ख़्वाब







बंद आँखों से ख़्वाब देखना

बिन मौसम बरसात समान
खुली आंखों से ख़्वाब देखना 
अपने हाथों आसमान छूने सामान ।

कौन कहता हैं, खुली आंखों से

देखे ख़्वाब पूरे नही होते
बस खुली आँखों से देखे
ख़्वाब में संकल्प होने चाहिए  ।

बंद आँखों से देखे ख़्वाब

इंसान को इंसान ही बनाये रहते हैं
जो खुली आँखों से देखे ख़्वाब
इंसान को महान इंसान बना देते है ।

बंद आँखों से देखे ख़्वाब

इंसान को नींद में ही आते हैं
खुली आँखों से, जो देखे ख़्वाब
इंसान को नींद ही नही आने देते हैं

बंद आँखों के ख़्वाब, आँखे

खोलने पर टूट जाते हैं
खुली आँखो के ख्वाब
आँखे बंद करने पर भी
दिमाग में आते  हैं
कौन कहता हैं , की ख़्वाब
देखना गुना  हैं
मैं कहता हूं ख़्वाब ही
इंसान को ऊँचाईयों पर पहुचते हैं ।

बंद आँखों से ख़्वाब देखना

बिन मौसम बरसात समान
खुली आँखों से ख़्वाब देखना
अपने हाथों आसमान छूने समान ।।


                                                       उदय राज✍️

                                                    
                                                  
                                            
                               
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इस कविता को लिखने का मेरा उद्देश्य  किसी की भावना को प्रभावित करना नही हैं  बल्कि  समाज के लोगो और युवा को  motivation करना हैं ।