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शीर्षक :- दुखों से भरा जीवन
लेकर खाली थैला जिंदगी में
खुशियां भरने चले थे लेकिन
जब रास्ते मे रूक कर थैला देखा
तो खुशियां की जगह कुछ
दुःख भी साथ लेकर चल पड़े थे
इन दुखों में भी कुछ
अपने तो कुछ पराये के थे
लेकिन सब लग रहे अपने थे
इस दुखों से भरे जीवन मे
दुख तो आते - जाते है
साथ ही एक नई चिंता दे जाते हैं
लेकिन इन दुखो की चिंता में
हम जीवन जीना भूल जाते हैं
कौन कहता हैं कि दुख.
जीवन मे चिंता भरते हैं
मै कहता हूं कि दुख ही
जीवन मे एक नई समस्या
खड़ी करते हैं और इस
समस्या के समाधान के कारण.
ही हम कुछ नया सीख जाते हैं
और यही सीखा हुआ नया ज्ञान
हमे जीवन मे सफ़लता दिला जाते हैं
लेकर खाली थैला जिंदगी में
खुशियां भरने चले थे लेकिन
जब रास्ते मे रुक कर थैला देखा
तो खुशियों की जगह कुछ
दुःख भी साथ लेकर चल पड़े थे ।
उदय राज ✍️
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लेकर खाली थैला जिंदगी में
खुशियां भरने चले थे लेकिन
जब रास्ते मे रूक कर थैला देखा
तो खुशियां की जगह कुछ
दुःख भी साथ लेकर चल पड़े थे
इन दुखों में भी कुछ
अपने तो कुछ पराये के थे
लेकिन सब लग रहे अपने थे
इस दुखों से भरे जीवन मे
दुख तो आते - जाते है
साथ ही एक नई चिंता दे जाते हैं
लेकिन इन दुखो की चिंता में
हम जीवन जीना भूल जाते हैं
कौन कहता हैं कि दुख.
जीवन मे चिंता भरते हैं
मै कहता हूं कि दुख ही
जीवन मे एक नई समस्या
खड़ी करते हैं और इस
समस्या के समाधान के कारण.
और यही सीखा हुआ नया ज्ञान
हमे जीवन मे सफ़लता दिला जाते हैं
लेकर खाली थैला जिंदगी में
खुशियां भरने चले थे लेकिन
जब रास्ते मे रुक कर थैला देखा
तो खुशियों की जगह कुछ
दुःख भी साथ लेकर चल पड़े थे ।
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