शनिवार, 25 जुलाई 2020

नई कविता :- सावन का महीना ( उदय राज की नई कविता :- 12 )✍️

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                   शीर्षक :- सावन का महीना





आता हैं , हर साल एक पावन महीना
जो लाता हैं , अपने संग ख़ुशी-उल्लास की उमंग
जो भर जाता हैं हममे जोश की नई तरंग
जो दे जाता हैं, बच्चों, जवानों , बूढ़ो को
निराशा के बजाए आशा की नई किरण
इस तरह समाई हैं, इस महीने में अनेकों खुबिया
इसलिए ये अनेको खूबियों से भरा
पावन का महीना, कहलाता हैं सावन
का महीना ।

ये ही पावन सावन का महीना
लाता हैं अपने संग घना - घोर वर्षा
और दिला जाता हैं रवि की तपन से राहत
और मिला जाता हैं कवि की नई कविता से
दे जाता हैं , प्रकति का नया सोंदर्य
और सावन के झुले झुलने का आनंद
इस तरह समाई हैं , इस महीने में अनेकों खुबिया
इसलिए ये अनेको खूबियों से भरा
पावन का महीना , कहलाता हैं सावन
का महीना ।

ये महीना ही दे जाता हैं
पेड़ों को नई कलियों की सौगात
और दे जाता हैं पेड़ों पर लगे
कच्चे फलों को पकने की शुरुआत
इस महीने में ही मिलती है सुनने को
मीठी- सुरीली कोयल की आवाज
जो पहुँचती हैं सब मे एक संदेश
की ख़त्म करो तुम ये कड़वाहट सी आवाज
और लाओ अपनी वाणी में
मुझ जैसी मीठी- सुरीला आवाज
इस तरह फैलाओ तुम जन-जन में
भाईचारे - बंधुत्व और प्रेम सी मिठास
इस तरह समाई हैं इस महीने में
सोंदर्य, सुंदरता और मिठास की
अनेको खुबिया
इसलिए ये अनेको खूबियों से भरा
पावन का महीना, कहलाता हैं सावन का महीना ।

इस पावन सावन के महीने में
ही होता हैं चारों ओर
देवो के देव महादेव का ही डंका
बजता हैं  सिर्फ इनकी ही भक्ति का घंटा
करते हैं सब लोग बड़े श्रद्धा भाव से
बोले कि भक्ति
और बोले भी दिखाते हैं सब पर अपनी शक्ति

इस तरह समाई हैं, इस महीने में अनेको खूबियां
इसलिए ये अनेकों खूबियों से भरा
पावन का महीना कहलता हैं सावन का महीना ।


             उदय राज ( ✍️ )





   

गुरुवार, 9 जुलाई 2020

नई कविता :- कोरोना और अर्थव्यवस्था ( उदय राज की नई कविता :- 11 ) ✍️

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 udayrajpoems.blogspot.com

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                शीर्षक :- कोरोना और अर्थव्यवस्था



       
 इस कोरोना काल में
लोकडाऊन की पुकार में
हर व्यवस्था पर संकट का विकराल पड़ गया
चलती - फिरती -दौड़ती अर्थव्यवस्था पर
यू ही एका एक अकाल पड़ गया
हर आदमी जो हैं इस अर्थव्यवस्था
का हिस्सेदार और भागीदार
उसकी भागीदारी और हिस्सेदारी का
सत्या नशा हो गया
बात करें चाहे दुकानदार की , नॉकरी वाले ,रेडी - पटरी वाले या फिर अपने मजदूरों की
हर आदमी की जिंदगी पर
ऐसा प्रहार पड़ गया , की
उसकी सामाजिक - आर्थिक जिंदगी पर
कोरोना का वार पड़ गया
इस कोरोना काल मे , लोकडाऊन की पुकारा में
हर व्यवथा पर  संकट का विकराल पड़ गया
चलती - फिरती-दौड़ती अर्थव्यवस्था पर
यू ही एका एक अकाल पड़ गया ।



इस कोरोना काल मे
अर्थव्यवस्था में हुए अकाल ने
लोगों को गरीब , तो गरीबो को
और गरीब कर दिया
मजदूरों को और मजबूर तो
उनकी जिंदगी को और दुखों से भर दिया
दुकान दरों को दुकानों से घरों पर
बैठा दिया , तो उन पर
दुकान के किराए का पहाड़ लाद दिया
इस तरह हर आदमी की जिंदगी हैं
प्रभावित इस कोरोना से
मैं बात करूं , किस - किस की
कहूंगा बस इतना कि
इस संकट के काल मे
हर भेदभाव और नफरतों को
यू ही मिटा के
दो तुम अपने और पराये को भी
सहयोग और साथ
ताकि सभी को यहाँ लगें की
इस संकट के काल मे भी
हम हैं , अपनों के साथ
हम हैं , अपनों के साथ
और इस तरह हम दिखाये
सब को भाई चारे की एक नई मिशल ।

इस कोरोना काल मे ,
लोकडाऊन की पुकार में
हर व्यवस्था पर संकट का विकराल पड़ गया
चलती - फिरती- दौड़ती अर्थव्यवस्था पर
यू ही एका एक अकाल पड़ गया ।


             उदय राज ( ✍️ )

शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

नई कविता :- असली चोर ( उदय राज की नई कविता :- 10 )✍️

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udayrajpoems.blogspot.com

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                         शीर्षक :- असली चोर






चोर वो नही होता जो
चोरी बता के करे
चोर वो होता है
जो चोरी छुपा के करें।

चोर वो नही होता
जो लोगो के समान चुराए
चोर वो होता हैं
जो लोगो के दिल चुराए
क्योंकि समान चुराए हुए
चोर को तो फिर भी भूल जाते हैं
लेकिन दिल चुराए हुए चोर को
हम चाह कर भी नही भूल पाते हैं ।

चोर वो नही होता
जो हाथों में हथियार लेकर चोरी करे
चोर तो वो होता हैं जो
हाथों में फूल लेकर चोरी करे
क्योंकि हथियार लेकर चोरी करने वाला
तो फिर भी समान चुराता हैं
लेकिन फूल लेकर चोरी करने वाला
तो मन-धन-तन के साथ - साथ
दिल , दिमाग , दिन का चेन ,
रातों की नींद भी चुराता हैं ।

चोर वो नही होता
जो डरा के या डर दिखा के चोरी करे
चोर तो वो होता है जो
प्रेम या प्यार देकर चोरी करे
क्योंकि डर दिखा के तो चोर
फिर भी कुछ हद तक
और कुछ समय तक ही
समान चुरा पाता हैं
लेकिन प्यार देकर तो
चोर पूरी जिंदगी में
हर पल , हर घड़ी
दिल चुराता हैं ।

चोर वो नही होता
जो चोरी बता के करे
चोर तो वो होता हैं जो
चोरी छुपा के करे ।


             उदय राज ( ✍️)

           
   Udayrajpoems.blogspot.com