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शीर्षक :- यादें
यादें भी क्या चीज हैं
कभी हँसती हैं , तो कभी रोलती हैं
कभी अपनों से दूर करती
तो कभी अपनों के पास ले आती
यारों ये यादें ही तो हैं
जो हमेशा साथ रह जाती हैं ।
ये यादें भी कैसी चीज है
जो जिंदगी के हर पल को
हर दूसरे ही पल याद बना लेती हैं
और हम चाहे या ना चाहें बाद
में बहुत याद आती हैं
इस तरह हम इससे दूर
हो नहीं पाते , और
ये हमसे दूर रह नही पाती
और इस तरह ना चाह के भी इस
जिंदगीं में यादें ही यादें भर जाती हैं ।
ये यादें भी छोटी चीज नहीं है यारों
इन यादों में ही लोग क्या से
क्या कर जाते हैं
इन यादों को ही सँजोने में
जीवन के बहुत से पलों को
यू ही बीता देते हैं
इस बात का तो इतिहास गवाह हैं
जब यादो को ही सँजोने में ताजमहल
जैसी इमारतें बन जाती है
यारो ये यादें ही हैं , जो
याद रखने के लिऐ कुछ ना कुछ
करवाती हैं ।
याद करो उन पलों को, जब
ददिहाल और ननिहाल में जाया करते थे
बहुत शरारते करने पर भी
वाह - वाह पाया करते थे
ना कुछ करके भी
सब्सिया पाया करते थे
याद करो उन पलों को भी
जब अंतिम चरण में जीवन के होंगे
तब किसी यादों पर परिवार संग
मुस्कराया करोगे , तो
किसी यादो पर अकेले घर के कोने पर
रोया और पसत्या करोगें
यारों ये यादें होतीं ही ऐसी हैं
जो जिंदगी भर साथ रह जाती हैं
फिर जिंदगी के हर पल में बहुत
याद आती हैं
और ना चाह कर भी इस जिंदगी में
इस तरह यादें ही यादें इस बस जाती हैं ।
ये यादें भी क्या चीज हैं
कभी हँसती हैं , तो कभी रोलती हैं
कभी अपनों से दूर करती , तो
कभी अपनों के पास ले आती
यारों ये यादें ही तो हैं
जो हमेशा साथ रह जाती हैं ।
उदय राज (✍️ )
Udayrajpoems.blogspot.com
इस कविता का यहाँ चित्र गूगल से लिया गया है ।
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यादें भी क्या चीज हैं
कभी हँसती हैं , तो कभी रोलती हैं
कभी अपनों से दूर करती
तो कभी अपनों के पास ले आती
यारों ये यादें ही तो हैं
जो हमेशा साथ रह जाती हैं ।
ये यादें भी कैसी चीज है
जो जिंदगी के हर पल को
हर दूसरे ही पल याद बना लेती हैं
और हम चाहे या ना चाहें बाद
में बहुत याद आती हैं
इस तरह हम इससे दूर
हो नहीं पाते , और
ये हमसे दूर रह नही पाती
और इस तरह ना चाह के भी इस
जिंदगीं में यादें ही यादें भर जाती हैं ।
ये यादें भी छोटी चीज नहीं है यारों
इन यादों में ही लोग क्या से
क्या कर जाते हैं
इन यादों को ही सँजोने में
जीवन के बहुत से पलों को
यू ही बीता देते हैं
इस बात का तो इतिहास गवाह हैं
जब यादो को ही सँजोने में ताजमहल
जैसी इमारतें बन जाती है
यारो ये यादें ही हैं , जो
याद रखने के लिऐ कुछ ना कुछ
करवाती हैं ।
याद करो उन पलों को, जब
ददिहाल और ननिहाल में जाया करते थे
बहुत शरारते करने पर भी
वाह - वाह पाया करते थे
ना कुछ करके भी
सब्सिया पाया करते थे
याद करो उन पलों को भी
जब अंतिम चरण में जीवन के होंगे
तब किसी यादों पर परिवार संग
मुस्कराया करोगे , तो
किसी यादो पर अकेले घर के कोने पर
रोया और पसत्या करोगें
यारों ये यादें होतीं ही ऐसी हैं
जो जिंदगी भर साथ रह जाती हैं
फिर जिंदगी के हर पल में बहुत
याद आती हैं
और ना चाह कर भी इस जिंदगी में
इस तरह यादें ही यादें इस बस जाती हैं ।
ये यादें भी क्या चीज हैं
कभी हँसती हैं , तो कभी रोलती हैं
कभी अपनों से दूर करती , तो
कभी अपनों के पास ले आती
यारों ये यादें ही तो हैं
जो हमेशा साथ रह जाती हैं ।
उदय राज (✍️ )
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